Qaidi Hai Bimar Lyrics | क़ैदी है बीमार | Ameer Hasan

Qaidi Hai Bimar Lyrics – Ameer Hasan

क़ैदी है बीमार

 

 

देख कर बेकसी भतीजे की
बोलीं रो-रो के जै़नब-ए-लाचार
अब ना बरसाओ पुश्त पर कोड़े
मर ना जाए कहीं मेरा बीमार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

 

हर लम्हा कोड़ों की अज़ीयत दुर्रों की उफ़ताद
हाय! मेरे बीमार की ग़ुर्बत किस से करें फ़रियाद
हाय! किस से करें फ़रियाद
हाय! किस से करें फ़रियाद
सब रस्ते कांटो से भरे हैं चलना है दुशवार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

 

तौक़-ए-गिरां है गर्दन में और पैरों मे ज़ंजीर
सर है झुकाए शर्म के मारे इब्न-ए-शहे दिलगीर
हाय! इब्न-ए-शहे दिलगीर
हाय! इब्न-ए-शहे दिलगीर
साथ हरम है बेपर्दा और शाम का है बाज़ार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

 

सब्र की ये अयूब तुम्हारे पास कहां तस्वीरें
धूप है ऐसी जलने लगी हैं लोहे की ज़ंजीरें
हाय! लोहे की ज़ंजीरें
हाय! लोहे की ज़ंजीरें
सारै बदन में पड़ गए छाले, हाय! मेरा बीमार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

 

क़ैद-ए-सितम में मौत जो आई बिन्ते शहे मुज़्तर को
खून भरे कुर्ते में ये कहकर दफ़्न किया ख़्वाहर को
हाय! दफ़्न किया ख़्वाहर को,
हाय! दफ़्न किया ख़्वाहर को
तुझको कफ़न भी दे नहीं सकता भाई है लाचार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

 

थाम के बेड़ी वक़्त-ए-सफ़र रो-रो के कहा मौला ने
कैसे कटेगा शाम का रस्ता ये तो ख़ुदा ही जाने
हाय! ये तो ख़ुदा ही जाने
हाय! ये तो ख़ुदा ही जाने
ऐसी है कुछ ज़ो’फ़-ओ-नक़ाहत चलना है दुश्वार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

 

मुमकिन है मौला ने कहा हो लाशा-ए-जरी के पास
देख सको तो देख लो उठकर मेरे चचा अब्बास
हाय! मेरे चचा अब्बास
हाय! मेरे चचा अब्बास
आपका बेटा बनके चला है क़ुनबे का सालार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

 

शर्म मुझे खाए जाती है, काश! अभी मर जाऊं
इस मंज़र को देख सकूं वो ताब कहां से लाऊं !
हाय! ताब कहां से लाऊं,
हाय! ताब कहां से लाऊं
बेपर्दा हैं मां बहनें और शाम का है दरबार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

 

शाम के जानिब कैसे चली थी पैगंबर की आल
कैसे पढे़गा आमिर उसको कैसे लिखूं मैं बिलाल
हाय! कैसे लिखूं मैं बिलाल
हाय! कैसे लिखूं मैं बिलाल
आगे आगे नैज़े पर था फ़र्क़-ए-शहे अबरार

क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार
क़ैदी है बीमार… क़ैदी है बीमार

 

Qaidi Hai Bimar Lyrics In Hindi


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